Thursday, October 30, 2008

तू मुस्कुरा रही है

मेरी धड़कन भी कुछ गा रही है,
तू मेरी यादों में मुस्कुरा रही है.

तेरा झूठा गुस्सा,
तेरी सच्ची बातें,
दो लम्हों का मिलना,
कितनी अधूरी मुलाकातें.

तेरा यूँ चुप हो जाना,
फ़िर शर्मा के खिलखिलाना,
तेरा दूर जाना,
फ़िर दिल के करीब आना.

तेरी अनूठी सादगी,
फ़िर अचानक भाव खाना,
मेरा दिल समझता है,
बिन बोले तेरा सब कह जाना.

मेरी धड़कन भी कुछ गा रही है,
तू मेरी यादों में मुस्कुरा रही है.

Wednesday, October 29, 2008

Matribhoomi

This poem is dedicated all the victims of hatred particularly to those affected by MNS sponsored violence. I have tried to translate the poem in English as my friend 'partha' asked for it.
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लहू-लहान हुई धारा,
भाई-चारा चल बसा,
नफरतों की ज्वाला से,
घर अपना ही जल गया.

ठुकराया गया अपने देश में,
गया सताया इस देश में,
कैसे दिखाए अपनापन,
तू है पराया इस देश में.

कैसे करू तुझको नमन,
मुझको बता ऐ भारत माँ,
जब तेरे ही बेटों ने मुझको,
घर से निकाला ऐ हिंदुस्तान.

गर्व तुझपे था जो,
हो गया है पूरा खंडित,
अगले जन्म में ऐ भारत,
न कहलाना मेरी मातृभूमि.
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English Translation

There is bloodshed on land,
Feeling of brotherhood has gone,
Flames of Hatred,
Have burnt my own home.

Insulted in my very own land,
Tortured in this land,
How to show affection,
When I am stranger in my own land.

How can I salute you,
Tell me O motherland!,
When your own sons,
Expelled me O Hindustan!

The pride in my land,
has been completely shattered,
In my next birth, O India!
I wish you won't be called my motherland

Wednesday, September 24, 2008

अजनबी

अजनबी, तुमसे पहचान पुरानी लगती है,
तेरे होंठों की मुस्कान सुहानी लगती है,
न समझो इसे मसखा जानम,
बातें दिल की यूँही बयां होती है.

Tuesday, August 05, 2008

मेरा चाँद छुप गया है

मेरा चाँद छुप गया है,
पर चाँदनी कम नही है,
तेरा साथ तो नही है,
पर सहारा कम नही है.

मेरा प्याला कब से खली है ऐ साकी,
पर मदहोशी कुछ कम नही है,
बड़ी अँधेरी है राहें तेरी मेरे मौला,
पर एक टिमटिमाता दिया भी रोशनी के लिए कम नही है.

Sunday, May 25, 2008

ख्वाइश

तेरी राहों पे फूल बिछाने की ख्वाइश है,
तुझे सताने और फ़िर मानाने की ख्वाइश है,
तेरे आंसुओं को चुराने की ख्वाइश है,
तेरी हर ख्वाइश को अपना बनाने की ख्वाइश है.

Tuesday, May 06, 2008

ख़ुद

ख़ुद ही तू तेरा खुदा रे बन्दे,
क्यों न समझे बात ये,
ख़ुद में पाप, ख़ुद में पुण्य,
ख़ुद में ही ये संसार रे.

ख़ुद को जब ढूंढ न पाए,
तो छाने किसकी खाक रे,
ख़ुद से बातें कर ले पहले,
बाकी सब कर बाद में.

साथी राह में बिछड़ जायेंगे,
ख़ुद ही तू तेरे साथ रे,
ख़ुद को जो पहचान ले बन्दे,
खुदा का तुझपे हाथ रे.

Tuesday, April 08, 2008

बरस जा

तेरा प्यार बरसने दे,
मुझे तू भीग जाने दे,
चिलमन के पीछे छुपी,
खुशी को अब आने दे.

नशा तेरे प्यार का मुझपे चढ़ जाने दे,
डूबने दे मुझे, अब होश में न आने दे,
प्रेम का दीपक न बुझाने पाए,
तू भी जल जा, मुझे भी जल जाने दे.

चाँदनी में तेरी जुल्फों का अँधेरा छाने दे,
तुझसे करू बातें, सारी दुनिया भूल जाने दे,
तेरी नरम-नरम साँसों में मुझे बस जाने दे,
सब भूल जाए मेरा नाम, मुझे दीवाना कहलाने दे.

Saturday, March 01, 2008

हजारों ख्वाहिशें ऐसी

हजारों ख्वाहिशें ऐसी

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

भ्रम खुल जाये जालीम तेरे कामत कि दराजी का
अगर इस तुर्रा-ए-पुरपेच-ओ-खम का पेच-ओ-खम निकले

मगर लिखवाये कोई उसको खत तो हमसे लिखवाये
हुई सुबह और घर से कान पर रखकर कलम निकले

हुई इस दौर में मनसूब मुझसे बादा-आशामी
फिर आया वो जमाना जो जहाँ से जाम-ए-जम निकले

हुई जिनसे तव्वको खस्तगी की दाद पाने की
वो हमसे भी ज्यादा खस्ता-ए-तेग-ए-सितम निकले

मुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले

जरा कर जोर सिने पर कि तीर-ऐ-पुरसितम निकले
जो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले

खुदा के बासते पर्दा ना काबे से उठा जालिम
कहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफिर सनम निकले

कहाँ मयखाने का दरवाजा 'गालिब' और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं, कल वो जाता था के हम निकले

-- मिर्जा गालिब (Mirza Ghalib)

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चश्म-ऐ-तर - wet eyes
खुल्द - Paradise
कूचे - street
कामत - stature
दराजी - length
तुर्रा - ornamental tassel worn in the turban
पेच-ओ-खम - curls in the hair
मनसूब - association
बादा-आशामी - having to do with drinks
तव्वको - expectation
खस्तगी - injury
खस्ता - broken/sick/injured
तेग - sword
सितम - cruelity
क़ाबे - House Of Allah In Mecca
वाइज़ - preacher



Tuesday, February 26, 2008

अनकही

कुछ बातें अनकही रह जाने दो,
कुछ नगमे बस मन में गुनगुनाने दो,
ख्वाबों सा लगता है तेरा जहाँ,
मुझे अब नींद से जग जाने दो.

कुछ लम्हों को तस्वीर बन जाने दो,
कुछ रिश्तें बस बेनाम रह जाने दो.

Monday, November 26, 2007

गुमसुम

This is another attempt at romantic poetry. I like urdu words so much, they have elegance, softness and more power to portray romantic feelings. Enjoy!!
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आज क्यों है हम-तुम गुमसुम,
क्यों अँधेरी ही ये चाँदनी,
आज क्यों खामोश है धड़कन,
क्यों बेसुरी है हर रागिनी.

कशिश है थोड़ी थोड़ी,
पर कहा है वो आशिकी,
लफ्ज़ है बरसते,
पर कहा है वो शायरी

बेखुदी है तुमसे,
तुमसे ही प्यार है,
बंदिशे है कुछ ऐसी,
कि होठों पे इंकार है.

Thursday, November 15, 2007

दिल और दिमाग

आज फ़िर से सोच रहा हूँ मैं की क्यूँ,
दिल और दिमाग साथ नही चलते,
दोनों एक ही शरीर के है हिस्से,
फ़िर जाने क्यों है इतने झगड़ते.

दिल है जीने की वजह,
दिमाग जीने की राह बताये,
दिल है प्रेम दीपक,
दिमाग जीवन-ज्ञान सीखाये.

दिल के बात सुने कोई, या सुने दिमाग की,
ये उलझन जाने कौन सुलझाए,
दिल जाने एहसास, दिमाग अनुभव से रह दिखाए,
दोनों जब मिल जाए साथ तो सच्ची खुशहाली आए.

Friday, November 09, 2007

ये कैसी दीवाली

न दिया है, न बाती है,
माँ! ये कैसी दीवाली है,
न पटाखे है, न वो धूम है,
माँ! ये कैसी अधूरी खुशहाली है.

यूँ तो दोस्तों का साथ है माँ,
पर सर पे तेरा हाथ नही,
दस तरह की मिठाई है माँ,
पर तेरे हाथ का कुछ भी नही.

इतनी दूर चला जाऊंगा,
ये कब सोचा था, माँ.
तेरे बिन न कोई त्यौहार,
न कोई दीवाली है

Saturday, October 27, 2007

Some good poems

Both of these poems are close to my heart
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पथ की पहचान

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

पुस्तकों में है नहीं
छापी गई इसकी कहानी
हाल इसका ज्ञात होता
है न औरों की जबानी

अनगिनत राही गए
इस राह से उनका पता क्या
पर गए कुछ लोग इस पर
छोड़ पैरों की निशानी

यह निशानी मूक होकर
भी बहुत कुछ बोलती है
खोल इसका अर्थ पंथी
पंथ का अनुमान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

यह बुरा है या कि अच्छा
व्यर्थ दिन इस पर बिताना
अब असंभव छोड़ यह पथ
दूसरे पर पग बढ़ाना

तू इसे अच्छा समझ
यात्रा सरल इससे बनेगी
सोच मत केवल तुझे ही
यह पड़ा मन में बिठाना

हर सफल पंथी यही
विश्वास ले इस पर बढ़ा है
तू इसी पर आज अपने
चित्त का अवधान कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।

है अनिश्चित किस जगह पर
सरित गिरि गह्वर मिलेंगे
है अनिश्चित किस जगह पर
बाग वन सुंदर मिलेंगे

किस जगह यात्रा खतम हो
जाएगी यह भी अनिश्चित
है अनिश्चित कब सुमन कब
कंटकों के शर मिलेंगे

कौन सहसा छू जाएँगे
मिलेंगे कौन सहसा
आ पड़े कुछ भी रुकेगा
तू न ऐसी आन कर ले।

पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।
---Harivansh Rai Bachchan.

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TWO roads diverged in a yellow wood,
And sorry I could not travel both
And be one traveler, long I stood
And looked down one as far as I could
To where it bent in the undergrowth; 5

Then took the other, as just as fair,
And having perhaps the better claim,
Because it was grassy and wanted wear;
Though as for that the passing there
Had worn them really about the same, 10

And both that morning equally lay
In leaves no step had trodden black.
Oh, I kept the first for another day!
Yet knowing how way leads on to way,
I doubted if I should ever come back. 15

I shall be telling this with a sigh
Somewhere ages and ages hence:
Two roads diverged in a wood, and I—
I took the one less traveled by,
And that has made all the difference.
--Robert Frost

Tuesday, October 23, 2007

तुमसे दूर

This one is little sad but romantic also :)
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तुझसे अलग पर तेरी पड्छाई से छिपता रहता हूँ,
तुमसे दूर पर तेरे ही करीब रहता हूँ,
देखता नही तुझे, पर खवाबों में मिलता रहता हूँ,
अब हाल कुछ ऐसा है बेरहम, तेरी तस्वीर से लिपटता रहता हूँ.

तुझे गिला है की मैं तुम्हे बदनाम करता हूँ,
तेरी-मेरी बातें सरे-आम करता हूँ,
शिकवा मत करो मेरी जान मुझसे,
मैं तो अब सब तेरे नाम करता हूँ.

उलझ न जाना ज़ज्बातों में,
ये तो सारा जहाँ कहता है,
भुला दू तुझे मैं अब,
ये तो मेरा खुदा कहता है.

Thursday, September 27, 2007

निशब्द

The idea of this poem was floating inside for quite sometime and today when I feel bored it has actually taken a shape. I will try to write a happy one next time :)
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शब्द तेरे दिल में चुभते रहे,
और मैं निशब्द खड़ा देखता रहा,
तेरी पड्छाई मुझसे उलझती रही,
और तेरी पड्छाई से दूर चलता रहा

मेरे एहसास हरपाल सिमटते रहे,
तुम हँसती रही, समझती नही,
दूर इतने हो गए है अब,
तेरी धड़कन भी दिल तक पहुचती नही

तेरा रास्ता अलग, तेरी मंजिल अलग,
हम दोनों के तो हैं सपने अलग,
मुड नही पाउँगा अब पीछे,
हम दोनों के तो हैं ज़न्नत अलग.

Monday, September 10, 2007

वो दिन

The poet inside turned romantic this time :)
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वो दिन भी कुछ अजीब थे,
जब छू लिया था तुने दिल को,
वो रातें भी कुछ खुशनसीब थी,
जब तुम आया करते थे ख्वाबों में.

वो तेरी जुल्फों से उन पलकों का छुप जाना,
फ़िर झटके से जुल्फें हटाके तेरा नज़ारे उठाना,
याद आता है फ़िर तेरे गालों का सुर्ख हो जाना,
कैसे भूलें उन नाज़ुक लबों से तेरा मुस्कुरा देना.

ज़चता नही कोई तुम्हारे सिवा,
तुने ऐसा क्या जादू कर दिया,
तेरी खुशी मुझे अजीज है,
दूर हो के भी तू करीब है.

Thursday, August 23, 2007

वो

वो हसी-हसी, वो खिली-खिली,
बोलती है पर, कुछ चुप-चुप भी.

वो ज़हाँ जाए, मच जाए हुडदंग,
वो ऐसे चली जैसे कोई पतंग,
उसकी उमंग, जैसे जलतरंग,
जब वो हो संग, बाजे मृदंग,
हर साँस में, उसकी सुगंध,
आने से उसके, जीवन में रंग.

Friday, August 17, 2007

तेरे सपने

Ham sab log sapne dekhte hai, unme se kai poore hote hai aur kuch toot bhi jate hai. This poem is dedicated to all those who dare to dream big :)
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तेरे सपने पूरे होंगे,
तू हार नही मान,
तू थक के नही बैठ,
जब लिया है कुछ ठान.

तू देख उस शिशु को,
जो सीख रहा है चलना,
चलने के लिए हर किसीको,
पड़ता है कई बार गिरना.

मत हो उदास कि,
सपने टँट गए तेरे,
ऐसा कौन हुआ इस जग में,
जिसने देखे नही झमेले.

किसी का सपना प्यार है,
सपनो से जीवन गुलज़ार है,
जो देखें नही सपने तो,
ये ज़िन्दगी बेजार है.

खुशी तो बाँटी है तुमने,
गम बाँट के भी देखले,
जो सपने है तेरे अधूरे,
मिल के करेंगे पूरे :)

Friday, August 10, 2007

जन्म-दिन,

This poem is dedicated to sneha, my sweet didi. Wish her all the best things in life on her birthday :). Keep smiling!
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वो हँसती रही है, हँसाती रही
हर मुस्कान में गम छुपाती रही,
वो डगमगाती रही, लडखडाती रही,
फ़िर भी चलने से वो घबडाती नही.

स्नेह से भर के वो सबका मन,
हर किसीको अपना बनाती रही,
जो जाने नही प्यार का मतलब,
उनपे भी वो प्यार लुटाती रही.

आँखें हंसती रही, आँखें रोती रही,
आँखें बोलती रही, आँखें डरती रही :),
जुबान से कह न पाए जो सब,
अनजाने में ही आँखें वो बताती रही.

मुबारक हो ये जन्म-दिन,
दुनिया आपकी जगमगाती रहे,
खुशी बाटें, और खुश रहे,
आज बस मेरी ये दुआ रहे.






Sunday, June 24, 2007

Some Special Lines

These lines are special for me as they are written during rest time (?? :) ) in hiking for ha ling peak, calgary.
http://www.geocities.com/truedino/haling.htm

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कैसे कह दू मैं दिल की बातें,
यूँ ही नही होती ऐसी मुलाकाते,
दूर हो के तुम न इतना सताते,
अपने दिल को गर समझ पाते
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पास हो के भी दूर हो,
जाने क्यों तुम मजबूर हो,
जो नज़र आता है तेरी आंखों में,
जुबान पे लाने से क्यों दूर हो.
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:) :) :)